एपीएचसी में अल्ट्रा पोर्टेबल एक्सरे मशीन से की गई 114 की जांच, मिले 44 संदिग्ध मरीज

एपीएचसी में अल्ट्रा पोर्टेबल एक्सरे मशीन से की गई 114 की जांच, मिले 44 संदिग्ध मरीज

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ग्रामीण स्तर पर कैंप लगाकर किया जा रहा है टीबी मरीजों की पहचान: एमओआईसी

इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा संचालित एक्सरे मशीन से मरीजों की खोज में हो रही है सहूलियत: डॉ आरपी सिंह

श्रीनारद मीडिया, छपरा,  (बिहार):

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त अभियान कार्यक्रम के तहत जिले के टीबी रोगियों को चिह्नित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोर्टेबल एक्स- रे मशीन से उपलब्ध करायी गयी है। जिससे शरीर में छिपे हुए टीबी जैसी बीमारी की जानकारी आसानी से लगाया जा ऱहा है। इस अभियान को गति देने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय लगभग 50 किलोमीटर दूर अनुमंडलीय अस्पताल सोनपुर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर सह अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवडीहा के परिसर में वर्ल्ड विज़न इंडिया के सी – 19 कार्यक्रम तहत स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य जांच का आयोजन में 114 ग्रामीणों का एक्सरे किया गया। जिसमें अल्ट्रा पोर्टेबल डिजिटल एक्स- रे मशीन से 44 टीबी के संदिग्ध मरीजों की आसानी से पहचान हुई।

इस अवसर पर इस अवसर पर अनुमंडलीय अस्पताल की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ पूनम कुमारी, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर सह अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नवडीहा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ बाल्मिकी प्रसाद गुप्ता, बीएचएम ओम प्रकाश, सिफार के धर्मेंद्र रस्तोगी, वर्ल्ड विजन इंडिया की ओर से सी 19 के जिला पर्यवेक्षक पंकज कुमार सिन्हा, वरीय यक्ष्मा प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस) वीरेंद्र कुमार, एएनएम पूजा कुमारी, निधि कुमारी और शोभा कुमारी, लैब टेक्नीशियन (एलटी) सुभाष राय और अभिषेक कुमार सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।

ग्रामीण स्तर पर कैंप लगाकर किया जा रहा है टीबी मरीजों की पहचान: एमओआईसी
अनुमंडलीय अस्पताल सोनपुर की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ पूनम कुमारी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग टीबी की जांच आम तौर से नहीं करवाते हैं। लेकिन अत्याधुनिक तकनीक वाली अल्ट्रा पोर्टेबल एक्सरे मशीन आने से इसका उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से हो रहा है। क्योंकि आधुनिक मशीन में टीबी की जांच शुरू होने पर इसकी रिपोर्ट एक मिनट के अंदर आने लगा है। इसके लिए संबंधित विभाग की ओर से लैब टेक्नीशियन को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके बाद स्थानीय स्तर के लैब टेक्नीशियन को भी प्रशिक्षित किया गया है। उसके बाद ही टीबी मरीजों की जांच के लिए पंचायत स्तर पर कैंप लगाया गया है। ताकि टीबी मरीजों को आसानी से पहचान करते हुए उनका सही समय पर इलाज किया जा सके।

 

इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा संचालित एक्सरे मशीन से मरीजों की खोज में हो रही है सहूलियत: डॉ आरपी सिंह
संचारी रोग पदाधिकारी डॉ रत्नेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीन को मोबाइल उपकरण माना जाता है। क्योंकि इसे अस्पताल के साथ विभिन्न स्थानों पर ले जाने में आसानी होता है। सबसे अहम बात यह है कि छोटी सी एक बैट्री द्वारा आपूर्ति की गई इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा संचालित होती है जो रेडियोग्राफर द्वारा कम प्रयास के साथ मोबाइल यूनिट चलाने की गति में सहायता करता है। मोबाइल एक्स-रे सिस्टम का उपयोग अक्सर उन रोगियों की छाती की रेडियोग्राफी करने के लिए किया जाता है जिन्हें रेडियोलॉजी विभाग में नहीं ले जाया जा सकता है। जैसे, एक मोबाइल एक्स-रे उपकरण को ऐसी अनूठी विशेषताओं के साथ डिज़ाइन किया गया है जिसे कि सीमित स्थानों में भी ले जाया जा सके। इसके उपयोग से किसी भी क्षेत्र में टीबी मरीजों की पहचान आसानी से हो सकता है।

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