कोर्ट के आदेश से बंगाल में 5 लाख ओबीसी सर्टिफिकेट होंगे रद्द

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 सीएम ममता बनर्जी ने कहा- कोर्ट का आदेश मंजूर नहीं

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 22 मई को एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए, पश्चिम बंगाल में 2010 से राज्य सरकार की तरफ से जारी किए गए 5 लाख ओबीसी सर्टिफिकेट को रद कर दिया। हाई कोर्ट ने राज्य में नौकरियों और सेवाओं में इस तरह के आरक्षण को अवैध बताया। अदालत ने कहा कि इन समुदायों को ओबीसी घोषित करने के लिए वास्तव में धर्म ही एकमात्र मानदंड प्रतीत होता है।

कोर्ट ने कहा, उसका मानना है कि मुसलमानों के 77 वर्गों को पिछड़ों के तौर पर चुना जाना पूरे मुस्लिम समुदाय का अपमान है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह अदालत इस संदेह को अनदेखा नहीं कर सकती कि उक्त समुदाय (मुसलमानों) को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए एक साधन माना गया।

राज्य के आरक्षण अधिनियम को चुनौती

राज्य के आरक्षण अधिनियम 2012 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने साफ किया कि जिन वर्गों का ओबीसी दर्जा हटाया गया है, उसके सदस्य यदि पहले से ही सेवा में हैं या आरक्षण का लाभ ले चुके हैं या राज्य की किसी चयन प्रक्रिया में सफल हो चुके हैं, तो उनकी सेवाएं इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगी।

कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) कानून, 2012 के तहत ओबीसी के तौर पर आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले 37 वर्गों को संबंधित सूची से हटा दिया। कोर्ट ने कमीशन से सलाह नहीं लेने के आधार पर सितंबर 2010 के एक कार्यकारी आदेश को भी रद्द कर दिया। इस आदेश के जरिए ही ओबीसी रिजर्वेशन 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया गया था। इसमें ए श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत और बी श्रेणी के लिए 7 प्रतिशत रिजर्वेशन का प्रावधान था।

पीएम मोदी ने साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि कोर्ट का फैसला विपक्ष के लिए ‘एक करारा तमाचा’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी इंडिया गठबंधन का ‘तुष्टीकरण का जुनून’ हर सीमा को पार कर गया है। पीएम मोदी ने कहा कि जब भी वह ‘मुस्लिम’ शब्द बोलते हैं, तब उन पर सांप्रदायिक बयान देने का आरोप लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि वह तो बस ‘तथ्यों को सामने लाकर’ विपक्ष को बेनकाब कर रहे हैं। पीएम ने कहा कि हाई कोर्ट ने यह फैसला इसलिए सुनाया क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने महज वोट बैंक की खातिर मुसलमानों को अवांछित ओबीसी प्रमाण पत्र जारी किए।

बंगाल हाईकोर्ट के फैसले पर राजद के नेता मनोज झा ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि एक श्रेणी के बारे में चर्चा हो रही है. जो मीडिया में चल रहा है ऐसा कुछ नहीं है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर उन्होंने निशाना साधा और कहा कि मंडल कमीशन की रिपोर्ट आप पढ़ें. उसमें गैर हिंदू समुदायों में किस आधार पर आरक्षण है? मनोज झा ने कहा कि हज्जाम अगर हिंदू है, हज्जाम अगर मुस्लिम है तो दोनों को आरक्षण है, कारण सामाजिक शैक्षणिक है. राजद सांसद ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि ट्विस्ट मत करिए. ये अगर हिंदू-मुसलमान नहीं करें तो ये पंचायत स्तर का भी चुनाव नहीं जीत सकते.

शाहनवाज हुसैन ममता बनर्जी पर बरसे..

भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर कहा कि मंडल कमीशन में जो जातियां शामिल थी उसका हमने कभी विरोध नहीं किया. लेकिन जब से ममता बनर्जी आई हैं तब से पिछड़ों का हक मारने के लिए मुस्लिम समाज की करीब सारी जातियों को पिछड़ा बना दे रही हैं.उसी को हाईकोर्ट ने खारिज किया है.

शाहनवाज हुसैन ने कहा कि इस देश में भाजपा पहले ही सवाल उठायी है कि धर्म के नाम पर संविधान में आरक्षण का प्रावधान नहीं है. लेकिन जो मंडल कमीशन में पिछड़े व पशमांदा मुस्लिम हैं उन्हें पहले से आरक्षण है. पर अलग से कोटा बनाकर 4% आंध्र, कर्नाटक , तेलांगना में दे दिया. उसी तरह ममता जी ने बैकवर्ड लिस्ट में सारे मुस्लिम को शामिल कर लिया. जो गलत है. इसी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. हम भी चाहेंगे कि पिछड़ों का हक नहीं मारे.

 

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