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पद्मश्री डॉ शांति जैन का हार्ट अटैक से निधन - श्रीनारद मीडिया

पद्मश्री डॉ शांति जैन का हार्ट अटैक से निधन

पद्मश्री डॉ शांति जैन का हार्ट अटैक से निधन

रेडियो पर उनका मानस पाठ हुआ था काफी मशहूर

 

shanti jain

‘बिहार गौरव गान’ की लेखिका, चर्चित साहित्यकार व गायिका पद्मश्री डॉ. शांति जैन का रविवार की सुबह निधन हो गया। पटना के लोहानीपुर स्थित आवास पर उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। उनके करीबी और युवा नर्तक जीतेन्द्र चौरसिया ने बताया कि डा. जैन पिछले दो-तीन दिनों से अस्वथ्य थीं। शनिवार की रात उन्होंने खाना खाया और सोईं तो फिर सदा के लिए अपनी आंखें मूंद ली। बताया जाता है कि हृदयाघात से उनका निधन हुआ है।

करीब 75 वर्षीया डॉ. शांति जैन बहुमुखी प्रतिभा की धनी और बिहार की रचनात्मक जगत में आदरणीया थीं। एचडी जैन कॉलेज आरा में संस्कृत विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त थीं। सन् 1997 में इन्होंने बिहार ‘बिहार गौरव गान’ की रचना की। पिछले 24 वर्षों में देश-विदेश में इसकी तीन हजार से अधिक प्रस्तुतियां हुई हैं। उनकी तीन दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। 1983 में पहली पुस्तक ‘चैती’ के लिए इन्हें राजभाषा सम्मान मिला।

2006 में केके बिड़ला फाउंडेशन का शंकर सम्मान दिया गया। 2009 में केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से ये नवाजी गईं। केन्द्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय का सीनियर फेलोशिप भी इन्हें प्राप्त था। बिहार सरकार ने 2017 में इन्हें हिन्दी प्रगित समिति का उपाध्यक्ष मनोनीत किया था।

बुंदेलखंड में जन्मी, आरा में पली-बढ़ी
4 जुलाई 1946 को डॉ. शांति जैन का जन्म बुंदलखंड के छतरपुर जिले के बकस्वाहा में हुआ था। पिता स्व. हेमराज जैन बकस्वाहा से आरा नौकरी के सिलसिले में आए और फिर शांति जैन यहीं की होकर रह गईं। सन् 1970 के दशक में आल इंडिया रेडिया पर इनका गाया मानस पाठ काफी लोकप्रिय हुआ था। फिर एक कवियत्री, एक अच्छी लोकगायिका, एक स्थापित गीतकार के रूप में इनकी ख्याति दिनों-दिन बढ़ती ही गई।

तीन दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित 
डॉ. शांति जैन ने जन्म तो लिया बुंदेलखंड में लेकिन बिहार के कलाजगत को अपनी लेखनी से खूब सींचा। खासतौर से लोक परंपरा को उन्होंने बहुत ही समृद्ध किया। इनकी श्रेष्ठतम रचनाओं में वृत्त के चारों ओर, चैती, कजरी, हथेली का एक सितारा, पिया की हवेली, छलकती आंखें, धूप में पानी की लकीरें, तरन्नुम, समय के स्वर, ऋतुगीत, तुतली बोली के गीत, चांदनबाला, बिहार के भक्तिपरक लोकगीत, लोकगीतों के संदर्भ और आयाम, वसंत सेना, कादम्बरी, वासवदत्ता, वेणी संहार की शास्त्रीय समीक्षा आदि प्रमुख हैं।

शांति दीदी के निधन से कलाजगत में शोक की लहर 
शांति जैन के निधन से कलाजगत में गहरा दुख है। कलाकारों के बीच वह शांति दीदी के नाम से मशहूर थीं। पद्मश्री उषा किरण खान, बिहार कोकिला शारदा सिन्हा, रंगकर्मी संजय उपाध्याय, तनवीर अख्तर, लोक गायक सत्येन्द्र कुमार संगीत, राजू मिश्रा, सुरेन्द्र नारायण यादव, ब्रजकिशोर दूबे, हरेकृष्ण सिंह मुन्ना, चित्रकार वीरेन्द्र कुमार सिंह आदि ने डा. शांति के निधन को बिहार के कलाजगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

 

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