योगी जी! स्वामी प्रसाद से अच्छे थे बाराबंकी के भाजपा विधायक?

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5 साल मलाई चापी? मौका आया तो भाजपा छोड़ भाग लिए?

मुख्यमंत्री जी प्रदेश सरकार में जिले से एक भी मंत्री नहीं था! यह दर्द तो बाराबंकी के लोगों को था ही?

जनविश्वास है कि बाराबंकी के विधायक मंत्री बनने के बाद न दिखाते पीठ?

आलेख :  कृष्ण कुमार द्विवेदी(राजू भैया) बाराबंकी (यूपी):

श्रीनारद मीडिया, सेंट्रल डेस्‍क:

बसपा से भाजपा में लाकर सरकार में मंत्री बनाए गए स्वामी प्रसाद मौर्य ने आज योगी सरकार पर तमाम आरोप लगाते हुए सरकार से इस्तीफा दे दिया ।अब वह सपा के आंगन में प्रवचन कर रहे हैं? स्पष्ट है कि भाजपा ने एक दलबदलू मानसिकता के व्यक्ति पर दांव लगाया और उसे सरकार में मंत्री बनाया! इसका बुरा परिणाम आज सामने है? दुर्भाग्य रहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को बाराबंकी जनपद में जीते हुए भाजपा विधायक पूरे कार्यकाल तक नहीं याद आए! बाराबंकी वासियों का दावा है कि! योगी जी स्वामी प्रसाद जी से इस मामले में अच्छे रहते बाराबंकी के विधायक! जनविश्वास है कि मंत्री बनने के बाद वे चुनाव के समय पीठ ना दिखाते!!

प्रदेश में भाजपा की सरकार का कार्यकाल पूरा गया है। लेकिन आज तक बाराबंकी यह उत्तर नहीं पा सका कि जिले के किसी भी भाजपा विधायक को इस सरकार में मंत्री क्यों नहीं बनाया गया? ऐसा सवाल इसलिए भी लाजमी है क्योंकि प्रदेश के ऐसे कई जनपद हैं जहां पर एक नहीं बल्कि तीन-तीन मंत्री ताजपोषित रहे हैं। ऐसे में जिले के 4 विधायकों में से किसी को मंत्री ना बनाना कहीं न कहीं चकित तो जरूर करता रहा! वैसे2017 में संपन्न विधानसभा चुनाव के बाद जब परिणाम आया था तब भाजपा ने यहां 6 में से 5 सीटों पर जीत का झंडा लहराया था। जैदपुर के भाजपा विधायक उपेंद्र रावत के सांसद बनने के बाद यह सीट भाजपा से छिटक कर सपा के खाते में चली गई। ऐसे में शेष बचे चार विधायकों में से क्या एक भी ऐसा विधायक नहीं रहा कि उसे योगी सरकार मंत्री बनाती। ऐसे सवाल जनपद के गली कूचे में सियासी चर्चा के दौरान आज प्रदेश सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्या की पलट बाजी के बाद कुछ ज्यादा ही उछल रहे हैं? दिलचस्प यह भी है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की पुत्री भाजपा सांसद संघमित्रा ने सफाई दी है कि उनके पिता अभी सपा में गए नहीं है?

राजनीतिक चर्चा के मुताबिक भाजपा के विधायकों में एक पूर्व मंत्री बैजनाथ रावत रहे तो वही पूरे अयोध्या मंडल में सबसे ज्यादा मतों से जीतने वाले दरियाबाद के विधायक सतीश शर्मा भी थे। शेष रामनगर एवं फतेहपुर के विधायक भी अपने इलाकों में काम करने में व्यस्त रहे। ऐसा नहीं है कि यहां भाजपा का संगठन काम करने में पीछे रहा।यदि लोकसभा चुनाव की बात करें तो मोदी सरकार जब पहली बार बनी तो उस समय भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रियंका रावत को सांसद बनाया ।उसके बाद जब उपेंद्र रावत को टिकट मिला तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने उन्हें भी सांसद बनाया। जैदपुर में जो भाजपा उपचुनाव हारी वह अति आत्मविश्वास व गुटबाजी के चलते हारी? इस मुद्दे पर यह भी कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि बाराबंकी ने भाजपा नेतृत्व के द्वारा जिले की अनदेखी का जवाब भाजपा को जैदपुर में हराकर दे दिया था।

राजनीतिक हैसियत कि यदि बात की जाए तो बाराबंकी में भले ही आज भाजपा के चार विधायक रहे हो लेकिन सत्ता का केंद्र यहां नजर नहीं आया! बाराबंकी की जनता एवं भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता इस बात से हतप्रभ जरूर थे कि योगी सरकार की नजर में जनपद का क्या एक भी विधायक मंत्री बनने के लायक नहीं था!

पूर्व की समाजवादी पार्टी की सरकार रही हो या फिर बहुजन समाज पार्टी की सरकार ।इन सरकारों में हमेशा जिले से दो अथवा तीन मंत्री जरूर बनाए गए। यही नहीं एक समय का समाजवादी दुर्ग कहा जाने वाला बाराबंकी कांग्रेस की सरकारों में भी मंत्री पद पाकर निहाल रहा है। ऐसे में भाजपा की सरकार में एक भी मंत्री पद बाराबंकी को ना मिलना कहीं न कहीं साफ दर्शाता है कि भाजपा संगठन में बैठे लोग बाराबंकी को कितनी उपेक्षित नजर से देखते रहे? प्रदेश सरकार बनी तब बाराबंकी आशावान था। उसके बाद जब मंत्रिपरिषद का विस्तार हुआ तब बाराबंकी इस चाह में था कि शायद उसे एक मंत्री पद इस बार मिल जाए पर ऐसा कुछ ना हो सका?

हाय री किस्मत भाजपा नेतृत्व को बाराबंकी दिखाई ही नहीं दिया? उसे दिखाई दिए तो दूसरे दलों से भाजपा में आए दलबदलू मानसिकता के स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे लोग? जिन्होंने 5 वर्षों तक भाजपा सरकार में मजे लूटे और जब चुनाव के समय आया तो उसी भाजपा सरकार में 50 कमियां गिना कर वह आज समाजवादी पार्टी के पाले में जा खड़े हुए! वैसे स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी भाजपा सांसद संघमित्रा ने सफाई दी है कि अभी उनके पिताजी सपा में गए नहीं है?
पूरे 5 वर्षों तक भाजपा के विधायक जनपद में तैनात कई ताकतवर अधिकारियों के सामने बस मिमियाने की स्थिति में खड़े नजर आए? भाजपा ने एक भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया? अर्थात प्रदेश में भाजपा की सत्ता थी लेकिन बाराबंकी में सत्ता का केंद्र नौकरशाहों की चौखट पर गिरवी पड़ा था? बाराबंकी वासी चर्चा के दौरान कहते हैं कि यदि योगी सरकार में भाजपा का जिले से एक भी विधायक मंत्री बनाया जाता तो वह स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे व्यक्ति की तरह पीठ दिखाकर आज चुनाव के समय ना भागता!लेकिन यह दुर्भाग्य है कि आज चाहे जो राजनीतिक दल हो उसे टिकाऊ नहीं बल्कि जिताऊ और बिकाऊ नेता ज्यादा पसंद आता है?

साफ है कि भाजपा को अपने ओरिजिनल कार्यकर्ता पर विश्वास करना चाहिए था। अपने असली समर्पित मानसिकता वाले कार्यकर्ताओं को मौका मिलने पर आगे बढ़ाना चाहिए था। यदि पार्टी सत्ता अथवा कुर्सी के लिए दलबदलू को बैसाखी बनाकर आगे बढ़ेगी तो उसका यही हाल होगा जो आज स्वामी प्रसाद मौर्या ने चुनाव के समय किया है? ऐसे में बाराबंकी का यही कहना है खासकर मुख्यमंत्री जी से कि! योगी जी स्वामी प्रसाद मौर्य से तो अच्छे ही रहते! बाराबंकी के भाजपा विधायक ?बस विश्वास तो करते आप…!लेकिन क्या कहे?हाँ मौका मिले तो आगे इस बात का व बाराबंकी का ध्यान जरूर रखना???

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