लालू को जेल से बाहर नहीं आने देगी सीबीआइ 

लालू को जेल से बाहर नहीं आने देगी सीबीआइ

 

श्रीनारद मीडिया, सेंट्रल डेस्‍क:

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राजद सुप्रीामो लालू प्रसाद यादव को सीबीआइ जेल से बाहर नहीं निकलने देना चाहती, इसलिए वह अदालत में लगातार समय मांगकर मामले को उलझा रही है। लालू के वकील कपिल सिब्‍बल के संगीन आरोपों के तुरंत बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने झारखंड हाई कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने सीबीआइ को जवाब दायर करने के लिए तीन दिनों का समय दिया था। बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने चारा घोटाले के दुमका कोषागार मामले में फिर से याचिका दाखिल कर जमानत की गुहार लगाई है। फिलहाल उनका इलाज एम्‍स, दिल्ली में चल रहा है।

इधर शुक्रवार को ही सुनवाई के कुछ देर बाद लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सीबीआइ की ओर जवाब दाखिल किया गया है। इसमें कहा है कि सीबीआइ की विशेष अदालत ने दुमका कोषागार से अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद को अगल- अलग धाराओं में सात- सात साल की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोनों सजाएं एक के बाद एक चलाई जानी है। इस तरह लालू प्रसाद को इस मामले में कुल 14 साल की सजा मिली है। ऐसे में आधी सजा सात साल मानी जाएगी। अब लालू प्रसाद की आधी सजा पूरा होना नहीं माना जा सकता है। ऐसे में अभी लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।

लालू यादव की जमानत पर अब 16 अप्रैल को सुनवाई

चारा घोटाला के चार मामलों में सजायाफ्ता राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत पर 16 अप्रैल को आगे की सुनवाई होगी। झारखंड हाई कोर्ट में आज सुनवाई के दौरान सीबीआइ ने इस मामले में जवाब देने के लिए अदालत से समय की मांग की। जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले में अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की है।

उच्‍च अदालत ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी, सीबीआइ इस मामले में तीन दिनों के अंदर अदालत में जवाब दाखिल करे। सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से हाजिर हुए सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि सीबीआइ की ओर से जानबूझ कर समय लिया जा रहा है। पिछली सुनवाई के दौरान ही हमने यह आशंका जताई थी कि याचिका दाखिल करने पर सीबीआइ की ओर से समय की मांग की जाएगी।

सिब्बल का आरोप- सीबीआइ जानबूझ कर मांग रही समय

कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान कहा कि सीबीआइ इसलिए समय लेना चाहती है, क्योंकि वो इस मामले में हाई कोर्ट के 19 फरवरी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर स्थगन आदेश प्राप्त कर ले। क्योंकि हाई कोर्ट इस मामले में सात साल के सजा की आधी अवधि मानकर जमानत पर सुनवाई कर रहा है। जबकि रांची की सीबीआइ कोर्ट ने चारा घोटाले के दुमका कोषागर मामले में लालू प्रसाद यादव को सात-सात साल की अलग-अलग सजा सुनाई है और दोनों सजाएं अलग-अलग चलाए जाने का आदेश दिया है।

ऐसे में लालू को मिली सजा कुल 14 साल की होती है। लालू प्रसाद के अधिवक्ता कपिल सिब्बल व देवर्षि मंडल ने अदालत को बताया कि लालू प्रसाद के मामले में ही सीबीआइ की ओर से सबसे ज्यादा जवाब दाखिल किया जा रहा है। उनकी कोशिश है कि लालू प्रसाद यादव किसी सूरत में जेल से बाहर नहीं निकल पाएं। जब लालू प्रसाद ने जमानत याचिका दाखिल की थी तो सीबीआइ के पास जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय था। लेकिन वे मामले की सुनवाई का इंतजार करते रहे, ताकि समय की मांग की जा सके।

लालू की ओर से कहा गया कि पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआइ की ओर से बहस पूरी कर ली गई थी। अब उनके पास कहने को कुछ नहीं है। ऐसे में समय मांगा जाना सही नहीं है। सीबीआइ के अधिवक्ता ने कहा कि वे इस मामले में जवाब दाखिल करना चाहते हैं। सीबीआइ की ओर से जवाब तैयार कर लिया गया है। जल्द ही अदालत में दाखिल किया जाएगा, इसलिए समय दिया जाए।

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