रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हुए कोरोना पाजिटिव, क्‍या देश में लगेगा तीसरा लाकडाउन?

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श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

देश में कोरोना तेज रफ्तार के साथ पांव पसार रहा है। अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोरोना पाजिटिव हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि मैंने आज हल्के लक्षणों के साथ कोरोना पाजिटिव आया हूं। मैं होम क्वारंटाइन में हूं। मैं उन सभी से अनुरोध करता हूं जो हाल ही में मेरे संपर्क में आए हैं, खुद को अलग करने और टेस्ट करने का अनुरोध करता हूं। इससे पहले गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती पंवार भी कोरोना पाजिटिव रह चुके हैं।

देश में कोरोना की बेकाबू रफ्तार

ज्ञात हो कि बीते 24 घंटे में कोरोना के 1,79,723 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 46,569 मरीज कोरोना से रिकवर भी हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोरोना से रविवार को 146 लोगों की मौत हो गई है। देश में कोराना के कुल मामले 3,57,07,727 हो गए हैं। वहीं, एक्टिव केस बढ़कर अब 7,23,619 हो गए हैं। कोरोना से अब तक 3,45,00,172 लोग रिकवर हो चुके हैं।

वहीं, अब तक 4,83,936 मरीज अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके साथ ही डेली पाजिटिविटी रेट बढ़कर 13.29 फीसद जबकि साप्ताहिक पाजिटिविटी दर बढ़कर 7.92 फीसद हो गई है।

देश कोरोना महामारी की तीसरी लहर से गुजर रहा है क्योंकि वायरस राज्यों में तेजी से फैल रहा है। इससे दैनिक संक्रमण में वृद्धि हो रही है। यह लगातार चौथा दिन है, जब भारत में कोरोना के दैनिक मामले एक लाख के पार आ रहे हैं। वहीं ओमिक्रोन के मामले भी तेजी से बढ़ रहा है।

कोरोना वायरस की तीसरी लहर पांच गुना तेजी से फैल रही है। देश के सात राज्‍यों में संक्रमण की विस्‍फोटक स्थिति है। ओमिक्रोन के तेजी से प्रसार के कारण मन में यह जिज्ञासा उत्‍पन्‍न होती है क्‍या देश में लाकडाउन लगेगा। देश के सात राज्‍यों की R वैल्‍यू 3 के ऊपर है यानी यहां कोरोना विस्‍फोटक होना तय है।

अगर देश में पहले के दो लाकडाउन पर नजर डालें तो देश में कोरोना की स्थिति पहले से ज्‍यादा भयावह हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या देश तीसरे लाकडाउन की कगार पर पहुंच गया है ? क्‍या सरकार तीसरे लाकडाउन की तैयारी में है ? आखिर इस पर क्‍या होगी सरकार की रणनीति ? कोरोना से निपटने में सरकार की क्‍या है तैयारी ?

तीसरी लहर की क्‍या है तैयारी ?

गाजियाबाद स्थिति यशोदा अस्‍पताल के एमडी डा. पीएन अरोड़ा का कहना है कि इस वक्‍त देश में स्‍वास्‍थ्‍य का आधारभूत ढांचा मजबूत हुआ है। कोरोना की पहली लहर और दूसरी लहर के बाद देश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं मजबूत हुई है। आज देश में करीब 18.03 लाख आइसोलेशन बेड का इंतजाम है। इसके अलावा 1.24 लाख आइसीयू बेड के इंतजाम है।

देश में 3.236 आक्‍सीजन के प्‍लांट है। इनकी क्षमता 3,783 मीट्रिक टन है। 1,14 लाख आक्‍सीजन कंसंट्रेटर केंद्र ने राज्‍य सरकार को मुहैया कराए हैं। 150 करोड़ वैक्‍सीन के डोज दिए जा चुके हैं। इसमें 64 फीसद आबादी को एक डोज मिल चुकी है और 46 फीसद आबादी को वैक्‍सीन की दो डोज लग चुकी है। ऐसे में यह उम्‍मीद कम ही है देश में कठोर लाकडाउन की स्थिति बनेगी। फ‍िलहाल कुछ राज्‍यों को छोड़ दिया जाए तो स्थिति काबू में हैं।

लाकडाउन से बचने के लिए हमें सरकार की गाइड लाइन और सुझावों पर कठोरता से अमल करना होगा। कोरोना प्रोटोकाल को कड़ाई से पालन करना होगा।

दूसरे लाकडाउन के बाद देश में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का क्‍या इंतजाम है?

सवाल यह है कि अगर देश के दूसरे लाकडाउन के फार्मूले पर चलें तो भारत में इसकी कितनी संभावना है। हालांकि, इस बार हालात थोड़े भिन्‍न हैं। डा. पीएन अरोड़ा का कहना है कि एक राहत वाली बात यह है कि देश में कोरोना की रफ्तार भले तेज हो, लेकिन अस्‍पताल में संक्रमितों की भर्ती होने का अनुपात दूसरी लहर की अपेक्षा काफी धीमी है।

इसके अलावा देश में दूसरे लाकडाउन के बाद देश में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं की क्षमता बढ़ी है। कुछ राज्‍यों को छोड़ दिया जाए तो पहले जैसा पैनिक नहीं है। हालांकि, दिल्‍ली, पश्चिम बंगाल और महाराष्‍ट्र में कोरोना की स्थिति थोड़ी गंभीर बनी हुई है। इसके बाद झारखंड‍, बिहार, यूपी, राजस्‍थान, गुजरात और हरियाणा में नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

किन-किन राज्‍यों ने लगाया प्रतिबंध ?

मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली, महाराष्‍ट्र और गुजरात में नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। एमपी में स्‍कूलों और कालेजों में 50 फीसद की उपस्थिति के साथ अन्‍य पाबंदियां लगाई गई है। राज्‍य में सार्वजनिक स्‍थलों पर जाने के लिए वैक्‍सीनेशन को जरूरी बनाया गया है। यूपी में 8वीं तक के स्‍कूल बंद कर दिए गए हैं।

सार्वजनिक स्‍थानों एवं समारोह में 200 लोगों की अनुमति है। दिल्‍ली में स्‍कूल और कालेज बंद हैं। सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्राम होम की व्‍यवस्‍था की गई है। गुजरात में स्‍कूल और कालेज खुले हैं, लेकिन सार्वजनिक स्‍थलों में वैक्‍सीनेशन को जरूरी किया गया है। इन तमाम उपबंधों से ओमिक्रोन को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

लाकडाउन का पहला फार्मूला और ताजा हालात

केंद्र सरकार के पहले फार्मूले को देखा जाए तो लाकडाउन की कितनी संभावना है। संक्रमण की रफ्तार को देखा जाए तो कोरोना के मामलों में ऐसी तेजी पहले कभी नहीं दिखी। इसलिए अगर पहले लाकडाउन के फार्मूले से चलें तो केंद्र सरकार को अब तक लाकडाउन लगा देना चाहिए। इससे संक्रमण की गति को नियंत्रित किया जा सके।

तीसरी लहर के दौरान छह जनवरी तक केस डबल होने की रफ्तार 454 दिन पर आ गई और इस दौरान रोज आने वाले कोरोना संक्रमण के मामलों में 18 गुना बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन हालात अभी काबू में है। सरकार को इस बात से राहत है कि अस्‍पताल में मरीजों की आमद कम है।

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