शीतलहर के साथ घने कोहरे ने बढ़ाई परेशानी,क्यों ?

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सर्दी का सितम रहेगा जारी

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड कहर ढा रही है। शीतलहर के साथ घने कोहरे ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राजधानी दिल्ली में दृश्यता घटकर महज 25 मीटर रह गई। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, दो पश्चिमी विक्षोभों के बीच बड़े अंतर के कारण बर्फ से ढके पहाड़ों से ठंडी हवाएं सामान्य से अधिक समय तक चलीं, जिससे कड़ाके की ठंड लंबी खिंच गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली में अगले तीन चार दिनों तक कोहरा छाया रहेगा। येलो अलर्ट भी जारी कर दिया गया है।

11 से 13 जनवरी तक ठंड से मिल सकती है राहत

वरिष्ठ मौसम विज्ञानी आरके जैनामणि ने बताया कि प्रदूषण और नमी मिलकर ही कोहरे का कारण बन रहे हैं। इसलिए अभी कई दिन तक मध्यम से घने स्तर का कोहरा रह सकता है। एक नए पश्चिमी विक्षोभ के असर से 11 से 13 जनवरी तक ठिठुरन भरी ठंड से कुछ राहत मिल सकती है। इस दौरान तापमान में वृद्धि होने के आसार हैं।

दिल्ली के तापमान में मामूली इजाफा

राष्ट्रीय राजधानी में न्यूनतम तापमान में मामूली इजाफा हुआ है। यह (सोमवार) लगातार पांचवां दिन था, जब दिल्ली का न्यूनतम तापमान (3.8 डिग्री) हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकांश हिल स्टेशनों डलहौजी (9 डिग्री), मनाली (6 डिग्री), देहरादून (6.5 डिग्री) और नैनीताल (6 डिग्री) से कम था। सैटेलाइट इमेज में पंजाब और उससे सटे राजस्थान से हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक कोहरे की परत दिखाई दी।

उत्तर प्रदेश में सर्दी से नहीं मिली राहत

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में न्यूनतम तापमान में मामूली बढ़त के बावजूद सर्दी से राहत नहीं मिली। 11 जनवरी से कोहरा कम होने के साथ प्रदेशभर में बदली छा सकती है। इसके बाद एक-दो दिनों में हल्की वर्षा हो सकती है। ओडिशा में भी शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। जम्मू और कश्मीर में ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में हल्की बूंदाबांदी ने कश्मीर में शीत लहर की स्थिति से राहत दी है।

बढ़ सकती है स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

मौसम विभाग ने एक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि राजमार्गों पर ड्राइविंग की कठिन स्थिति, दुर्घटना और बिजली लाइनों की ट्रिपिंग भी संभव है। ट्रेनों के परिचालन में देरी, डायवर्जन और उन्हें रद भी किया जा सकता है। लंबे समय तक कोहरे के कारण अस्थमा ब्रोंकाइटिस से पीडि़त लोगों में घरघराहट, खांसी और सांस की तकलीफ हो सकती है। इससे आंखों में जलन या संक्रमण भी हो सकता है। ऐसे में विभाग ने सलाह दी है कि लंबी यात्रा के दौरान यात्रियों को पानी और दवा जैसी जरूरी चीजें अपने साथ रखनी चाहिए।

घने कोहरे से 175 उड़ानें प्रभावित

घने कोहरे के कारण विमान सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। दिल्ली स्थित आइजीआइ एयरपोर्ट व आसपास के इलाके में दृश्यता घटकर करीब 50 मीटर रह गई। रविवार मध्य रात्रि से सोमवार रात तक 175 उड़ानें विलंब हुईं। इनमें 21 उड़ानें अंतरराष्ट्रीय थीं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में जेद्दाह जाने वाली उड़ान में करीब आठ घंटा का विलंब हुआ। वहीं, काठमांडू की उड़ान में तीन व दुबई जाने वाली उड़ान में करीब चार घंटे का विलंब हुआ। अन्य उड़ानों में एक से दो घंटे का विलंब हुआ।

घरेलू उड़ानों की बात करें तो जम्मू की उड़ान में पांच घंटे, बागडोगरा की उड़ान में करीब छह घंटे, पुणे की उड़ान में छह घंटे, धर्मशाला की उड़ान में चार घंटे व बरेली की उड़ान में पांच घंटे का विलंब हुआ। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, इस मौसम में कोहरे के कारण पहली बार इतनी संख्या में उड़ानों को विलंब की स्थिति से दोचार होना पड़ा।

दृश्यता कम होने के कारण दिल्ली आ रहीं पांच उड़ानों को डायवर्ट कर जयपुर उतरने को कहा गया। इनमें शारजाह, अहमदाबाद, कोची, पुणे, कोलकाता से दिल्ली आ रहे विमान शामिल हैं। आगरा में लखनऊ फ्लाइट को रद कर दिया गया। वाराणसी में बाबतपुर एयरपोर्ट पर एक दर्जन विमान निरस्त रहे। काठमांडू, भुवनेश्वर, बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई समेत एक दर्जन विमान डायवर्ट किए गए। शारजाह से वाराणसी पहुंचा एयर इंडिया का विमान ही लैंड कर सका।

वहीं, अगले 24 घंटों के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाया रहेगा। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले 48 घंटों तक घना कोहरा छाया रहेगा। जम्मू, हिमाचल, बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय और त्रिपुरा में अगले 2-3 दिनों तक घना कोहरा रहने वाला है।

मौसम विभाग ने भी माना जलवायु परिवर्तन का पड़ रहा प्रभाव

स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत से बताया कि दिसंबर का महीना 122 सालों में सर्वाधिक गर्म रहा है, लेकिन जनवरी का महीना शुरुआती दौर से ही ठंडा रहा है। तापमान सामान्य से काफी नीचे चले गए हैं। ये स्थिति न सिर्फ दिल्ली एनसीआर बल्कि उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में देखने को मिल रही है।

उन्होंने आगे बताया कि चरम मौसमी घटनाओं ऐसा लगभग हर ऋतु में हो रहा है। या तो बरसात होगी नहीं, होगी तो फिर रिकार्डतोड़। या तो सर्दी पड़ेगी नहीं और जब पड़ेगी तो जबरदस्त। गर्मी भी हर साल नया रिकार्ड बना रही है। अब तो मौसम विभाग ने भी जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग को स्वीकार कर लिया है।

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