मातृभाषा हिन्दी लगातार समृद्ध हो रही है-प्रो.राजेन्द्र बडगूजर.

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श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

मातृभाषा हिन्दी लगातार समृद्ध हो रही है। शिक्षण संस्थानों में भी यह झुकाव खूब दिख रहा है। खासकर उच्चतर शिक्षा में इसका उपयोग बढ़ा है। हिन्दी में शोध के प्रति छात्रों का खासा आकर्षण दिख है। इसका उदाहरण जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय है। जहां अभी हिन्दी विभाग में अभी 23 छात्र शोध कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र सिंह के अनुसार, हिन्दी भाषा के प्रति रुझान तेजी से बढ़ा है। नामांकन लेने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है।
आधुनिक गद्य, कविता, आत्मकथा, निबंध में शोध कर रहे छात्र:विश्वविद्यालय में हिन्दी के विभिन्न विधाओं में छात्र शोध कर रहे हैं।विभागाध्यक्ष प्रो. सिंह के अनुसार, आधुनिक गद्य, कविताएं, आत्मकथा, निबंध, लोक साहित्य, आलोचना, भक्तिकाल आदि में छात्र कर रहे हैं। शोध करने वालों में बिहार के अलावे महाराष्ट्र, दिल्ली व यूपी के भी छात्र हैं। उन्होंने बताया कि हिन्दी भाषा की समृद्धि में लोकभाषा का महत्वपूर्ण स्थान होता है। इसलिए यहां भोजपुरी लोक साहित्य को हिन्दी पाठ्यक्रम में रखा गया है।

यहां वर्ष 2019 में शोध शुरू हुआ। अभी 23 छात्र शोध कार्य से जुड़े हैं। यूजी में शुरू में 15-16 छात्र थे, जिनकी संख्या आज 60 है।
प्रतियोगिता विश्वविद्यालय 14 से 28 तक आयोजित कर रहा विशेष पखवारा: केंद्रीय विश्वविद्यालय का हिन्दी विभाग 14 से 18 सितंबर तक विशेष हिंदी पखवारा आयोजित कर रहा है। जिसमें 14 सितंबर को हिन्दी दिवस समारोह, 16 को हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता, 17 को स्वरचित काव्यपाठ, 20 को वाद-विवाद प्रतियोगिता, 22 सितंबर को गैर शैक्षिक कर्मियों के लिए हिन्दी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, 24 सितंबर को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, 27 सितंबर को हिंदी भाषण प्रतियोगिता व 28 सितंबर को समापन व पुरस्कार वितरण समारोह होगा।

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