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ऑनलाइन पढ़ाई  बच्‍चों के मानसिक तनाव का बन सकता है कारण - श्रीनारद मीडिया

ऑनलाइन पढ़ाई  बच्‍चों के मानसिक तनाव का बन सकता है कारण

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ऑनलाइन पढ़ने-पढ़ाने से आनेवाली भविष्य की दिक्कते

?:बच्चो की सामाजिक उन्नति में होंगी दिक्कतें
?:ऑनलाइन पढ़ाने से शिक्षकों में बना असुरक्षा का माहौल

श्रीनारद मीडिया, मनीष कुमार, सीवान (बिहार):

छोटे बच्चों को स्कूल जाने में रूचि इसलिए नहीं होती क्योंकि वे पढ़ना चाहते हैं। स्कूल जाने के उनके कारण बौद्धिक और तकनीकी न होकर भावनात्मक होते हैं।बच्चे उन शिक्षकों के कारण स्कूल जाते हैं, जो उन्हें प्यार देते हैं।हालांकि एक कक्षा में सत्तर या उससे अधिक बच्चों को पढ़ाने वाले बच्चों के शिक्षक के मन में तनाव ज्यादा प्यार कम ही बचता होगा,पर मैंने कुछ मुख्यधारा के स्कूलों में भी शिक्षक-शिक्षिकाओं को देखा है जिन्हें देख कर बच्चे खुश हो जाते हैं,और अगले दिन भी उनसे मिलने की प्रतीक्षा में रहते हैं। बच्चे किसी विषय और शिक्षक के बीच फर्क नहीं करते।जो शिक्षक उन्हें खुशी देता है और सुरक्षित महसूस कराता है, उसके विषय को वह जाने-अनजाने में पसंद करने लगते हैं।

“ऑनलाइन शिक्षा ने शिक्षक को भी बहुत असुरक्षित बना दिया है। वह तनाव में रहता है और इसका असर उसके अध्यापन पर भी पड़ता है।ऑनलाइन शिक्षा में एक शिक्षक यह महसूस करता है कि जब पढ़ाई इसी तरह होनी है, तो स्कूल या कॉलेज किसी बहुत ही मशहूर एवं शुद्ध रूप से पेशेवर शिक्षक की ऑनलाइन सेवाएँ भी ले सकता है और इस तरह नियमित शिक्षकों की तो छुट्टी ही हो जायेगी।यह डर बेबुनियाद नहीं।आप अखबारों में ऐसे स्तम्भ देखते हैं जिसे एक ही लेखक कई अख़बारों को भेजता है और सभी अखबार उसे इसके लिए पैसे देते हैं।इन सिंडिकेटेड स्तम्भों की तरह सिंडिकेटेड व्याख्यान भी हो सकते हैं एक ही अनुभवी प्रोफेसर एक ही विषय पर अपने व्याख्यान कई स्कूल और कॉलेज को दे सकता है,सबसे अलग अलग रकम वसूल करके।क्यों नहीं हो सकता ऐसा? और कौन सा शैक्षिक संस्थान यह नहीं चाहेगा कि उसके यहाँ दुनिया के सबसे अच्छे शिक्षक उपलब्ध हों।अच्छे शिक्षक की तलाश में वह देश से बाहर ताकेगा और ऐसे कई कारोबारी शिक्षक उसे मिल जायेंगें।ऐसे में ख़ास कर निजी स्कूलों और कॉलेज में शिक्षकों को नौकरी जाने की चिंता बहुत सता रही है।लगातार अपनी नौकरी के बारे में चिन्तित शिक्षक पढ़ायेगा क्या? यह सवाल देर-सवेर हमारे सामने आएगा ही। निजी स्कूलों के लिए अपने शिक्षकों को नियुक्त करने, उनकी कई जिम्मेदारियां संभालने और उनकी अनुपस्थिति की समस्याओं से बचने का यह अच्छा अवसर होगा और वे तो इसका खूब फायदा उठायेंगें।एक और गंभीर चुनौती शिक्षकों के सामने है और वह यह कि ऑनलाइन शिक्षा में उन्हें बेहतर तरीके से पढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरुरत होगी| ऐसा इसलिए क्योंकि जिन स्त्रोतों का उपयोग अभी तक वे करते आये थे वे अब बच्चों को भी उपलब्ध हैं।पहले शिक्षक आराम से यू ट्यूब,और अलग-अलग वेबसाइट्स से मदद लेकर अपने व्याख्यान तैयार करते थे,और अब ये सभी छात्रों को भी सरलता से उपलब्ध हैं।तो एक तरह से छात्र के सामने दोनों विकल्प हैं, शिक्षक भी और वे स्त्रोत भी जिसका शिक्षक उपयोग करता है!अब वह किसे चुने? इससे शिक्षा की गुणवत्ता नहीं सुधरी है, बल्कि शिक्षक ज्यादा असुरक्षित हो गया है।

“गौरतलब है कि स्कूल सिर्फ अकादमिक विषयों की पढाई के लिए नहीं होते, वहां बच्चा आपसी संबंधों से बहुत कुछ सीखता है। अपने घर से निकलकर पहली बार वह अजनबियों के संपर्क में आता है और उसे कई नए,सुखद और दुखद अनुभव होते हैं।अपने घर की चारदीवारी में कैद होकर पढना शुरू में उसे दिलचस्प लग सकता है, पर धीरे-धीरे जब इसके दुष्प्रभाव उसपर पड़ेंगे तब नयी तरह की चुनौतियां परिवारों और समाज के सामने आयेंगीं। यह सही है कि यह सब कुछ कोई खुशी-खुशी नहीं कर रहा, महामारी से जन्मी परिस्थितियों ने मजबूर कर दिया है और इसलिए स्कूल वगैरह छोड़ कर बच्चों को घरों में कैद होना पड़ा है, पर इस पर बहुत अधिक ध्यान देने की जरुरत है। एक समस्या का हल ढूँढने के फेर में हम कई नयी समस्याओं को न्योत रहे हैं, इस तथ्य को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता।”

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