बिहार में राष्ट्रपति ने चौथे कृषि रोड मैप को किया लॉन्च!

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श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

तीन कृषि रोड मैप से फसलों के उत्पादन में हुई वृद्धि

ऐतिहासिक रूप से भी बिहार से जुड़ा है ओड़िशा

राष्ट्रपति ने कहा कि मेरा गृह राज्य ओड़िशा भी ऐतिहासिक रूप से बिहार से जुड़ा है. इसलिए मुझे लगता है कि मैं भी अपने-आप को बिहारी कह सकती हूं. राष्ट्रपति ने कहा कि मैं बिहार को अपना राज्य मानती हूं. मुख्यमंत्री ने मुझसे बिहार आने को कहा है. मैं बीच-बीच में जरूर बिहार आऊंगी. कभी मेरे पूर्वज यहां रहा करते थे. अभी मेरे भाई-बहन और उनके बाद की पीढ़ी रह रही है. मैं किसान की बेटी हूं. यहां जैविक खेती कैसे होती है, कैसे भंडारण होता है, रोड मैप से कैसे काम हो रहा है मुझे ये ये सब देखना है. क्योंकि राष्ट्रपति का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद मुझे भी गांव जाकर खेती करनी है.

सुरीनाम में भी देखी बिहार की झलक

राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि बिहार की लोक-संस्कृति का एक अहम हिस्सा है. बटोहिया और बिदेसिया से लेकर कटनी और रोपनी गीतों तक की बिहार की लोक-संस्कृति और साहित्य की यात्रा ने पूरे विश्व में अपनी पहचान बनायी है. मैंने सूरीनाम की अपनी यात्रा के दौरान वहां पर पुरातन बिहार की झलक देखी. विशाल भौगोलिक दूरी और अलग-अलग टाइम जोन में होने के बावजूद बिहार से गये लोगों ने जहां एक ओर अपनी संस्कृति और परंपरा को संजोये रखा है. वहीं, दूसरी ओर स्थानीयता में भी रच-बस गये हैं.

मानव निर्मित संकीर्णता से बाहर निकलना होगा

बिहार भगवान बुद्ध और अशोक की धरती है. उन्होंने संपूर्ण मानवता को शांति और सद्भाव का पाठ पढ़ाया है. यहां की पावन धरती के वासी होने के नाते यह अपेक्षा की जाती है कि आप एक ऐसे समाज का आदर्श प्रस्तुत करें जिसमें द्वेष और कलह की कोई गुंजाइश न हो. विकसित भारत के सपने को पूरा करने में इस प्रदेश का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है. लेकिन, इस सपने को सच्चाई में बदलने के लिए हमें मानव-निर्मित संकीर्णताओं से बाहर निकलना होगा. बिहार को एक विकसित राज्य बनाने के लिए समेकित विकास के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

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