रघुनाथपुर : सुहागिन महिलाओ ने पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए की वट सावित्री  पूजा

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श्रीनारद मीडिया,प्रसेनजीत चौरसिया, सीवान (बिहार)

ज्‍येष्‍ठ माह के  कृक्षण पक्ष अमावस्या के अवसर पर गुरूवार को सुहागिन महिलाएं अहले सुबह पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना के के लिए बरगद के पेड़ का पूजन किया । वट के पेड़ को कच्चा सूत, मोली,रोली चावल ,गुड तथा जल में दूध मिलाकर अर्पण किया और बड़ के पत्तों को गहनों के रूप में धारण किया । वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीघायु और परिवार की  खुशहाली की कामना किया। ज्येष्ठ अमावस्या पर गायों को हरा चारा डालीी।
पंडित उमादत्त पांडेय बताते है कि  वृक्ष होंगे तो पर्यावरण बचा रहेगा और तभी जीवन सम्भव है।मान्यता है कि सावित्री वट  वृक्ष  के नीचे  अपने पति को लेकर बैठी थी और यमराज से प्राण वापस करा ली तभी से  महिलाएं वट वृक्ष की  पूजा करने से लम्बी आयु, सुख-समृद्धि और अखण्ड सौभाग्य का फल प्राप्त होता है। यह व्रत स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक, पापहारक, दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है। अग्नि पुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है अतः सन्तान प्राप्ति के लिए इच्छुक महिलाएं भी इस व्रत को करती हैं।

वट वृक्ष की धार्मिक मान्यता-
इस पेड़ में बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ लटकी हुई होती हैं जिन्हें देवी सावित्री का रूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु एवं डालियों में त्रिनेत्रधारी शिव का निवास होता है। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।अपनी विशेषताओं और लम्बे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्वर माना गया है। वट वृक्ष की छाँव में ही देवी सावित्री ने अपने पति को पुनः जीवित किया था। इसी मान्यता के आधार पर स्त्रियां अचल सुहाग की प्राप्ति के लिए इस दिन बरगद के वृक्षों की पूजा करती हैं।

वट सावित्री व्रत रखने वाली महिलाएं स्नान के बाद सुंदर आभूषण और वस्त्र पहन यानी सोलह श्रृंगार कर इस वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की मूर्ति रखकर विधि-विधान से पूजा करती हैं। कच्चे दूध और जल से वृक्ष की जड़ों को सींचकर वृक्ष के तने में सात बार कच्चा सूत या मोली लपेटकर यथाशक्ति परिक्रमा करती हैं।

लाल वस्त्र, सिन्दूर, पुष्प, अक्षत, रोली, मोली, भीगे चने, फल और मिठाई सावित्री-सत्यवान के प्रतिमा के सामने अर्पित करती हैं। साथ ही इस दिन यमराज का भी पूजन किया जाता है। पूजा के उपरान्त भक्तिपूर्वक हाथ में भीगे हुए चने लेकर सत्यवान-सावित्री की कथा का श्रवण और वाचन करना चाहिए। ऐसा करने से परिवार पर आने वाली अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं।घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

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