वक्फ बिल पास होने पर कहीं खुशी तो कहीं गम

दिल्ली में भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन से निगरानी की गई
दिल्ली में एहतियान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन से निगरानी की गई। दिल्ली में मुस्लिम बहुल इलाकों में लोगों ने वक्फ संशोधन विधेयक का स्वागत किया। इसे मुस्लिम समाज के हित में बताते हुए एक-दूसरे को बधाई दी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विद्यार्थी संगठन ‘शहर-ए-आरजू’ ने परिसर में विधेयक के समर्थन में रैली निकाली।
वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी
संगठन के बजमी खान ने कहा कि यदि वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग होता तो आज देशभर में उच्च स्तरीय मुस्लिम स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय और अस्पताल होते। संशोधित विधेयक से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और समुदाय को इसका समुचित लाभ मिलेगा।
शहर-ए-आरजू की सदस्य नाजनीन फातिमा ने कहा कि इस बदलाव से मुस्लिम लड़कियों के लिए छात्रवृत्ति, महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम और उद्यमिता में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनके आर्थिक और सामाजिक स्तर में सुधार होगा।
हिंदू न्याय पीठ ने मिठाइयां बांटी
पंजाब में पुतले जलाकर प्रदर्शन किया
उधर, पंजाब के लुधियाना, जालंधर व मंडीगोबिंद गढ़ में मुस्लिमों ने वक्फ विधेयक के पुतले जलाकर प्रदर्शन किया। कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में प्रदर्शन कर इसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई। बिहार में किशनगंज जिले के कोचाधामन में विधायक इजहार असफी के नेतृत्व में रैली निकाली गई।
जमुई और दरभंगा में प्रदर्शन किया गया
जमुई और दरभंगा में प्रदर्शन किया गया। उप्र के संभल में अबूबकर मस्जिद के पास यूपी अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशफाक सैफी के बहनोई जाहिद की वहां मौजूद सपा समर्थक कुछ लोगों से वक्फ संशोधन बिल को लेकर मारपीट हो गई।
मुफ्ती ने दी सन 1947 के वाकये को दोहराने की धमकी
अलीगढ़ में जमीयत उलेमा ए हिंद के जिलाध्यक्ष मुफ्ती अकबर कासमी का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया में प्रसारित हो रहा है। इसमें उन्होंने कहा है कि यह बिल वापस लेना होगा। कहीं ऐसा न हो कि मुस्लिम समाज सड़कों पर आ जाए और 1947 वाला वाकया दोहरा जाए।
जरूरत पड़ी तो कोर्ट भी जाएंगे
हालांकि, बाद में कासमी ने कहा कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। मेरे कहने का मकसद यह नहीं था। मेरा कहना है, यह बिल मुसलमानों के हित में नहीं है। इसका विरोध करते रहेंगे। जरूरत पड़ी तो कोर्ट भी जाएंगे।
मुनंबम भू संरक्षण समिति के बैनर तले 173 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे इन लोगों ने नरेन्द्र मोदी जिंदाबाद जैसे नारे लगाए और उम्मीद जताई कि नया कानून लागू होने के बाद यह मुद्दा सुलझ जाएगा। इन प्रदर्शनकारियों में अधिकतर ईसाई हैं।
मुनंबम समुदाय में खुशी
समिति के संयोजक जोसेफ बेनी ने उम्मीद जताई कि विधेयक लागू होने पर उन्हें अपनी संपत्तियों पर राजस्व अधिकार मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि संसद में केरल के निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे कांग्रेस और वाममोर्चा के सांसद मुनंबम समुदाय की चिंताओं को आवाज देने में विफल रहे, जिससे लोगों को दुख हुआ है।
एर्नाकुलम जिले के चेराई और मुनंबम गांवों में निवासियों ने आरोप लगाया है कि वक्फ बोर्ड उनके भूमि और संपत्ति पर अवैध रूप से स्वामित्व का दावा कर रहा है, जबकि उनके पास पंजीकृत दस्तावेज और भूमि कर भुगतान रसीदें हैं।