सुशील कुमार मोदी का 72 साल की उम्र में हुआ निधन
वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे
जेपी आंदोलन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी का सोमवार (13 मई) को निधन हो गया. ने बीते कुछ समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. इस घातक बीमारी की वजह से उन्होंने इस बार का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया था. 72 साल की उम्र में अंतिम सांस लेने वाले सुशील कुमार मोदी का राजनीतिक सफर काफी उतार चढ़ाव वाला रहा है. आइए, उनके बारे में विस्तार से जानते हैं.
पटना में हुआ था जन्म
सुशील कुमार मोदी का जन्म 05 जनवरी, 1952 को पटना में हुआ था. उनके पिता का नाम स्व. मोती लाल मोदी और मां का नाम स्व. रतना देवी था. सुशील कुमार मोदी ने डॉ. जेसी सुशील मोदी से शादी की थी. वे वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय की प्रोफेसर भी हैं. उनके दो बेटे हैं. बड़े बेटे का नाम उत्कर्ष और छोटे बेटे का नाम अक्षय अमृतांशु है.
कितने पढ़े लिखे थे सुशील कुमार मोदी?
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने राम मोहन राय सेमिनरी, पटना से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी. इसके बाद पटना साइंस कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया था. ने एमए की पढ़ाई बीच में छोड़कर ही जे.पी. आंदोलन में शामिल हो गए थे.सुशील कुमार मोदी साल 2000 में संसदीय कार्य मंत्री बने थे. इसके बाद 2005 से 2013 तक वह उप मुख्यमंत्री-सह वित्त मंत्री रहे. इसके बाद वे देश भर के वित्त मंत्रियों की प्राधिकृत समिति के अध्यक्ष निर्वाचित हुए.
सुशील कुमार मोदी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे. वह 1971 में छात्रसंघ के 5 सदस्यीय कैबिनेट के सदस्य निर्वाचित हुए थे. फिर 1973 से 1977 तक पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री के तौर पर अपनी भूमिका निभाई थी. 1974 में जेपी आंदोलन में सुशील कुमार मोदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आपातकाल के दौरान वह जेल भी गए थे. सुशील मोदी 1983 से लेकर 86 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश मंत्री, प्रदेश संगठन मंत्री सहित कई पदों पर रहने के बाद 1983 में उन्हें महासचिव बनाया गया था.
पार्टी में भी मिला बड़ा दायित्व
सुशील कुमार मोदी 1995 में बीजेपी विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक निर्वाचित हुए थे. इसके बाद साल 1995 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री मनोनीत हुए. साल 2004 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत हुए. वहीं, साल 2005 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित हुए.
सुशील मोदी ने 2017 में लगातार आंकड़ों के सहारे लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को घेरा जिसका नतीजा यह हुआ कि सरकार गिर गई. हालांकि, 2020 में एनडीए सरकार में सुशील मोदी को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया. उन्हें राज्यसभा भेजकर केंद्र की राजनीति की ओर अग्रसर किया गया था. साल 2020 में रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट से सुशील मोदी को राज्यसभा भेज दिया गया था. हालांकि राज्यसभा में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया.
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