केंद्र सरकार ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क
केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में दूसरी बार वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पेश किया। विधेयक पर कुल आठ घंटे चर्चा होगी। अगर यह लोकसभा में पारित होता है तो गुरुवार को इसे राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। बिल के समर्थन में सरकार का कहना है कि इससे जवाबदेही तय होगी। वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता आएगी। विपक्षी दल इसे संविधान के खिलाफ बताने में जुटे हैं।
वक्फ क्या है?
वक्फ अरबी का शब्द है। इसका मतलब खुदा के नाम पर दी जाने वाली वस्तु या संपत्ति है। इसे परोपकार के उद्देश्य से दान किया जाता है। कोई भी मुस्लिम अपनी चल और अचल संपत्ति को वक्फ कर सकता है। अगर कोई भी संपत्ति एक भी बार वक्फ घोषित हो गई तो दोबारा उसे गैर-वक्फ संपत्ति नहीं बनाया जा सकता है।
पहली बार कब बना वक्फ एक्ट?
देश में पहला वक्फ अधिनियम 1954 में बनाया गया था। इसी के तहत वक्फ बोर्ड का गठन किया गया था। इसका मकसद वक्फ के कामकाज को सरल बनाना था। 1955 में पहला संशोधन किया गया। 1995 में नया वक्फ कानून बनाया गया था। इसके तहत राज्यों को वक्फ बोर्ड गठन की शक्ति दी गई। साल 2013 में संशोधन किया गया और सेक्शन 40 जोड़ी गई।
देशभर में वक्फ बोर्ड के पास कितनी संपत्ति?
देशभर में सबसे अधिक जमीन भारतीय रेलवे और सशस्त्रबलों के पास है। संपत्ति के मामले में वक्फ बोर्ड तीसरे नंबर पर आता है। उसके पास आठ लाख एकड़ से अधिक जमीन है। बोर्ड की अनुमानित संपत्ति 1.2 लाख करोड़ रुपये है। 2009 में वक्फ बोर्ड के पास कुल 4 लाख एकड़ जमीन थी।
कौन करता है संपत्तियों का रख-रखाव?
वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ बोर्ड करते हैं। देशभर में कुल 32 वक्फ बोर्ड हैं। हर राज्य में एक वक्फ बोर्ड होता है। यूपी और बिहार में दो शिया वक्फ बोर्ड भी हैं। वक्फ बोर्ड एक कानूनी इकाई है। यह संपत्ति को अर्जित करने और प्रबंधन का काम देखता है। वक्फ संपत्तियों को न तो बेचा जा सकता है और न ही पट्टे पर दिया जा सकता है।
अभी वक्फ बोर्ड में कौन-कौन होता?
अभी तक वक्फ बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा प्रदेश सरकार के सदस्य, मुस्लिम सांसद, विधायक, बार काउंसिल के सदस्य, इस्लामी विद्वान और वक्फ के मुतवल्ली शामित होते थे।
वक्फ अधिनियम में संशोधन क्यों?
कानून में संशोधन करने के पीछे सरकार का तर्क है कि वक्फ बोर्ड के कामकाज को सुव्यवस्थित बनाना और वक्फ संपत्तियों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करना है। वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का उद्देश्य वक्फ अधिनियम- 1995 में संशोधन करना है। इससे वक्फ संपत्तियों का रेगुलेशन और प्रबंधन करने में आसानी होगी।
- पिछले अधिनियम की कमियों को दूर करना।
- अधिनियम का नाम बदलने जैसे बदलाव करके वक्फ बोर्डों की कार्यकुशलता को बेहतर करना।
- वक्फ की परिभाषाओं को अपडेट करना।
- पंजीकरण प्रक्रिया में सुधार करना।
- वक्फ रिकॉर्ड के प्रबंधन में तकनीक का दखल बढ़ाना।
सरकार का मानना है कि मौजूदा वक्फ कानून ने कई तरह के विवादों को जन्म दिया है। वक्फ के ‘एक बार वक्फ… हमेशा वक्फ’ के सिद्धांत से विवाद उपजे हैं। बेट द्वारका के द्वीपों पर दावों को अदालतों ने भी उलझन भरा माना। सरकार का तर्क है कि वक्फ अधिनियम 1995 और 2013 में इसमें किया गया संशोधन अब प्रभावकारी नहीं है। इससे कुछ समस्याएं पैदा हुई हैं।
अभी क्या समस्या आ रही थी?
- वक्फ भूमि पर अवैध कब्जा।
- कुप्रबंधन और स्वामित्व विवाद।
- संपत्ति पंजीकरण और सर्वेक्षण में देरी।
- बड़े पैमाने पर मुकदमे और मंत्रालय को शिकायतें।
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