जग ज्योति दरबार के सहयोग से राष्ट्र कल्याण के लिए चल रहे दस दिवसीय मां त्रिपुरा सुंदरी महायज्ञ का हुआ समापन 

जग ज्योति दरबार के सहयोग से राष्ट्र कल्याण के लिए चल रहे दस दिवसीय मां त्रिपुरा सुंदरी महायज्ञ का हुआ समापन

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श्रीनारद मीडिया, वैद्य पण्डित प्रमोद कौशिक,  कुरुक्षेत्र,  :

महायज्ञ के समापन अवसर पर अनेकों संत महापुरुष पहुंचे।

राष्ट्र कल्याण एवं धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के चौमुखी विकास हेतु लुखी में चल रहे दस दिवसीय महायज्ञ तथा कथा का मां त्रिपुरा सुंदरी और मां गंगा की भव्य महाआरती के साथ सोमवार को समापन किया गया। पूर्णाहुति और समापन के अवसर पर स्वामी इंदर गिरी जी और सूर्य नंद जी महाराज सहित अनेक संत महापुरुष भी शामिल हुए। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भी आहुति दी।

देश विदेश में सनातन प्रचार का अभियान चला रहे धर्मगुरु महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि धर्म नगरी में अनेकों यज्ञ होते आए है और होते रहेंगे। परंतु यज्ञ का वास्तविक महत्व और यज्ञ को विधि और उसका कर्म फल कैसे मिलता है इसकी अनुभूति इस महायज्ञ में लोगों ने जानी है। यज्ञ से भगवान प्रसन्न होते हैं तथा भगवान की प्रसन्नता ही यज्ञ है। महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि त्रिपुरा सुंदरी पीठाधीश यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 हरिओम महाराज जी ने पिछले दस दिनों में जो जानकारी दी और देवी मां की स्तुति अपने मुख से इस पावन धरती पर गाकर, सुना कर लोगों को धन्य कर दिया।

त्रिपुरा सुंदरी पीठाधीश यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 हरिओम महाराज जी ने अपने जीवन के विभिन्न प्रदेशों के अनुभव साझा किए और कहा कि कुरुक्षेत्र की भूमि पावन है। यहां के लोगों में उन्हें श्रद्धा और भाव भी दिखाई दिए हैं। लुखी और इस धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की भूमि दोनों से भगवान का जो प्राचीन रिश्ता है वो मेरे दस दिन की तपस्या और कथा से साक्षात दिख गया। अंत में स्वामी हरिओम जी ने कपिस्थली कैथल में 31 मार्च से 06 अप्रैल तक एक भव्य महायज्ञ और धर्म रथ विजय यात्रा के आयोजन की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा हमारे जैसे फकीरों और संतो को राजनीति का ज्ञान नहीं परंतु साधु के आशीर्वाद और वाणी में परमात्मा का आशीर्वाद होता है। इस अवसर पर जग ज्योति दरबार के सैंकड़ों भक्तों सहित कालेश्वर यज्ञशाला से प. राजेश मौदगिल, सेवक राजकुमार एवं कार्यक्रम आयोजक राहुल राणा, प. रमेश शर्मा, हरीश शर्मा, गौरव इत्यादि भी मौजूद रहे।
महायज्ञ के समापन अवसर पर संत महापुरुष।

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