विकास यात्रा का अंतिम आदमी यही है शायद कोई पहचान ले

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जीवन से संघर्ष का असली नायक है बेलवार,रघुनाथपुर का मनु

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सीवान जिले प्रखंड मुख्यालय रघुनाथपुर से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बेलवार जहां गांव के शुभारंभ नाहर तिराहे पर एक हंसमुख व्यक्ति हर रोज सुबह के 8 बजते ही अपने ठेले के साथ खड़ा हो जाता है ।अपने परिवार की दिनचर्या और जरूरतों को पूरा करने के लिए कभी 50 तो कभी 100 तक की कमाई हो जाती है

हर रोज देखा करता था कभी-कभी बढ़ती गर्मी को देख भूख और प्यास मिटाने मनु के ठेले के पास खड़ा हो जाता। बड़े अदब और प्यार से चने के सत्तू को पीकर गले का तराश मिटाता। एक दिन अचानक मनु के वास्तविक जिंदगी को खंगालने लगा। तब से स्तब्ध और हैरान हूं। वर्तमान की राजनैतिक सामाजिक तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को देख। शायद किसी की नजर जाती तो अंतरात्मा से आवाज आती•••••••व्यवस्थाओं का असली हकदार यही अंतिम आदमी है।

पता चला मनु को 12 वर्ष हो गए पत्नी के मानसिक रोग को झेलते हुए ।एक लड़का तथा एक लड़की के साथ मनु रोज की जिंदगी का सुबह उठने के साथ रात को बिछावन पर सोने के बाद तक संघर्ष में तय करता है।

मकान की हालत जैसे कब धराशाई हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता।अस्त व्यस्त घर कुछ बर्तन कुछ कपड़ों के साथ मनु का दिनचर्या सुबह उठकर घर बर्तन करना फिर खाना बनाकर पत्नी को दवा खिलाना तथा एक छोटी बच्ची के सहारे उसकी देखरेख में छोड़ तिराहे पर सत्तू भुजा के ठेला लगा जिंदगी का जंग लड़ने चल देता है ।देखरेख की कमी के चलते 10 वर्षीय लड़के को उसके मामा के घर वाले लेकर चले गए।

आस-पड़ोस के लोगों से पता करने पर मालूम हुआ कि जब बारिश का वक्त होता है तो जंगल झाड़ में स्थित इस पुस्तैनी कहने को एक कमरे का जर्जर घर में सांप बिच्छू भी टहलने लगते हैं। मानसिक हालत खराब होने के चलते पत्नी का कोई ठिकाना नहीं । सब कुछ मनु के उपर निर्भर है ‌।बारिश की टपकती बूंदों में मनु रात भर यूं ही खंभे की ओट में बैठा रह जाता है ।की बारिश थमेगी तो कुछ चैन की नींद लूंगा।

पूछने पर अपने दर्द को अंदर छुपा हंसते हुए कह देता है••• साहब जी कोई बात नहीं यही तो असली जिंदगी है जो नसीब में लिखा होगा वही होगा ऊपर वाले का आसरा है जब देना होगा तो जरूर देगा। वैसे बहुतों से गुहार लगाया। अब थक गया हूं। परिवार और घर की हालत इस तरह छोड कर अब कहा जाउ।

 

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