जहरीली शराब पीने से तीन की मौत.

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खाने में मिलाया जहर, साला और जीजा की मौत

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। इस बीच शराब पीकर मौत का सिलसिला जारी है। औरंगाबाद में शराब पीने से बुधवार को भी शेरघाटी में इलाज करा रहे तीन लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में खिरियावां निवासी विनय कुमार गुप्ता उर्फ बबलू गुप्ता (30 वर्ष), कटईया निवासी मनोज यादव, बेरी निवासी रविन्द्र सिंह, (65 वर्ष) शामिल है।

इसके अलावे चौधरी मुहल्ला निवासी धनंजय चौधरी, बेरी निवासी मोहम्मद नेजाम बेरी निवासी गुडु सिंह की स्थिति गंभीर  स्थिति बनी हुई है। गया के चंडीस्थान अस्पताल में इलाज चल रहा है।

बुधवार को तीन लोगों की मौत के बाद औरंगाबाद में शराब पीने से मरने वालों की संख्या 11 हो गई है। इसके पहले मंगलवार  को 8 लोगों की मौत जहरीली शराब के सेवन से हो गई थी। मंगलवार को मदनपुर के खिरियावां के शिव साव (65), मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सुंदरगंज के अनिल शर्मा (45), सलैया के शिक्षक संतोष कुमार साव (30), मदनपुर के बेरी गांव के राहुल मिश्रा (25), अररूआ के सुरेश सिंह (65) और मदनपुर के पड़रिया गांव के दिल्केश्वर महतो व कमलेश राम और मदनपुर के जोगरी के रामजी यादव की मौत हुई थी

उधर, गया में भी शराब पीने के बाद तीन लोगों ने दम तोड़ दिया। उनकी मौत मंगलवार को हुई थी जबकि 12 लोग गंभीर रूप से बीमा हैं। गया में जिन लोगों की मौत हुई उनमें अमर पासवान (36), अर्जुन पासवान (42) व वसंत यादव (34) शामिल हैं। गया में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।

बिहार में अब शराबबंदी कानून तोड़नेवालों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने पर काम शुरू कर दिया गया है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ऐसे लोगों पर और सख्ती करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने के साथ चुनाव लड़ने से भी प्रतिबंधित करने पर विचार किया जा रहा है। इस सिलसिले में शुक्रवार को विभाग में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई।

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्वाचन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पंचायती राज, परिवहन, सहकारिता, सहित कई विभागों के पदाधिकारियों की राय ली गई। मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम 2016 की धारा 65 में यह प्रावधान है कि राज्य सरकार चाहे तो किसी भी धारा के तहत चार्जशीटेड या सजायाफ्ता को कई तरह की सुविधाओं और लाइसेंस हासिल करने आदि से वंचित कर सकती है। इसके लिए स्पष्ट नीति बनाने का काम चल रहा है, जिसके मद्देनजर बैठक में विचार-विमर्श किया गया।

सूत्रों के अनुसार, सभी विभागों से ऐसी सरकारी योजनाओं की जानकारी ली गई है जिनका लाभ लोगों को दिया जाता है। विभागों के अधिकारियों से पूछा गया कि विभागीय नियमावली में किसी व्यक्ति के सजायफ्ता हो जाने पर उनको किन-किन अधिकारों या सुविधाओं से वंचित किया जा सकता है। विभागों से मिली जानकारी के आधार पर जल्द ही फाइनल ड्राफ्ट तैयार किए जाने की संभावना है। इसके बाद प्रस्ताव को कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड घोषई गांव में खाने में जहर मिलाकर दो लोगों को मार डाला गया। जहरीला पदार्थ मिला खाना चार लोगों ने खाया था। रिश्ते में साला-बहनोई की जान जा चुकी है, दो का अभी इलाज चल रहा है। बीमारों में एक को भागलपुर रेफर किया गया है दूसरे का इलाज सहरसा के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। परिजनों ने तीन लोगों पर भोजन में जहरीला पदार्थ मिलाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है।

बताया गया कि चौसा प्रखंड के घोषई निवासी सुबोध झा के पुत्र अभिनव कुमार उर्फ गोलू और दामाद सहरसा जिले के रामपुर निवासी आलोक कुमार झा, दूसरे दामाद सहरसा के ही मानस कुमार झा, घोषई के ही मनोज झा के पुत्र प्रभात कुमार ने रविवार की देर शाम एक साथ बैठकर भोजन किया। कुछ घंटे बाद सुबोध झा के दामाद आलोक झा और पुत्र अभिनव उर्फ गोलू को उल्टी-दस्त शुरू हो गया।

कुछ और पल गुजरने के बाद प्रभात और मानस की भी हालत बिगड़ने लगी। हालात ज्यादा बिगड़ने पर रविवार की देर रात को आलोक झा सहित चारों लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौसा में भर्ती कराया गया। सीएचसी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. अमित कुमार ने आलोक झा को मृत घोषित कर दिया। अभिनव, प्रभात और मानस को समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर कर दिया गया।

परिजनों के अनुसार, सुबोध झा के दूसरे दामाद मानस को इलाज के लिए सहरसा भेज दिया गया, पुत्र अभिनव उर्फ गोलू को भागलपुर मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया। मायागंज अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार की सुबह करीब साढ़े दस बजे अभिनव की भी मौत हो गई। मानस का सहरसा के निजी अस्पताल में इलाज कराए जाने की बात कही जा रही है।

प्रभात कुमार झा का भागलपुर के मायागंज अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस घटना से पूरे गांव के लोग सकते में आ गए हैं। एसडीएम राजीव रंजन कुमार सिन्हा ने बताया कि सुबोध झा का अपने पड़ोसी से जमीन विवाद चल रहा था। आपसी रंजिश में पड़ोसी द्वारा खाने में जहर मिलाने से यह घटना होने की बात समाने आयी है। परिजनों के आवेदन पर हत्या का केस दर्ज कराया गया है।

घोषई गोठ बस्ती में साला-बहनोई की मौत मामले में दिनभर शराब पीने की अफवाह उड़ती रही। ग्रामीणों के बीच यह अफवाह तेजी से फैली कि रविवार की रात चार लोगों ने छत पर बैठकर खान-पान किया। इस दौरान उनलोगों ने जहरीली शराब का सेवन किया। इसी वजह से चारों लोगों की तबीयत खराब हो गयी। हालांकि परिजनों और प्रशासन ने शराब की बात को सिरे से नकारते हुए इसे अफवाह करार दिया।

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