सिविल ड्रेस में जुमई के गांव में पहुंचे UP पुलिस के दो अधिकारी, लगा रहे थे चक्कर, लोगों ने घुमा दिया फोन और.

सिविल ड्रेस में जुमई के गांव में पहुंचे UP पुलिस के दो अधिकारी, लगा रहे थे चक्कर, लोगों ने घुमा दिया फोन और.

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श्रीनारद मीडिया, स्‍टेट डेस्‍क:

यूपी पुलिस के दो अधिकारियों को सादा कपड़ों में जुमई के एक गांव में जा कर मामले की जांच करना भारी पड़ गया, दरअसल एक मामले की जांच के सिलसिले में बरहट थाना क्षेत्र के भंडरा गांव में यूपी पुलिस के दो अधिकारी सिविल ड्रेस में पहुंचे। यहां उन्हें ग्रामीण के विरोध और शक का सामना करना पड़ा। सिविल ड्रेस में गांव पहुंचे इन दो पुलिस पदाधिकारी को देखकर ग्रामीणों को ऐसा लगा कि कहीं यह लोग फर्जी अधिकारी तो नहीं है। इसके बाद गांव वालों ने इन लोगों की सूचना स्थानीय थाना को दे दी। सूचना पाते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने जांच की फिर ग्रामीणों को बताया कि यह लोग उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी हैं, युवती के मामले में जांच करने पहुंचे थे अधिकारी

मिली जानकारी के मुताबिक, एक युवक कुछ दिनों पहले एक युवती को बहला फुसलाकर भगा लाया था। इसी मामले में जांच करने यूपी पुलिस के दो अधिकारी गांव पहुंचे। यूपी पुलिस आरोपी को पकड़ने और युवती को बरामद करने के लिए घर की शिनाख्त कर रही थी। बाइक पर दोनों अधिकारी इधर से उधर घूम रहे थे और लोगों से पूछताछ कर रहे थे। सिविल ड्रेस में यूपी पुलिस के अधिकारी को देख ग्रामीणों ने समझा फर्जी सिविल ड्रेस में यूपी पुलिस के दोनों अधिकारियों को देखकर ग्रामीणों को कुछ शक हुआ तो गांव वालों ने उन्हें घेर लिया। इस पर दोनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस का अधिकारी बताते हुए ग्रामीणों को अपना आई कार्ड भी दिखाया।

 

इसके बाद भी ग्रामीणों को इन पर विश्वास नहीं हुआ तो स्थानीय थाना पुलिस को फर्जी अधिकारी होने की सूचना दे दी, 2 घंटे में गांव में चक्कर लगा रहे थे यूपी पुलिस से अधिकारी

ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस को बताया कि यह लोग 2 घंटे से दो युवक के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए मोटरसाइकिल से गांव में घूम रहे थे। पूछताछ के दौरान इन लोगों ने उत्तर प्रदेश पुलिस का अधिकारी बताया। ये लोग ग्रामीण शंभू दास और भोला दास के बारे में पूछताछ कर रहे थे। साथ ही यह भी बताया कि उनके घर पर ही भगाई गई युवती को छुपाया गया है। उसका नंबर सर्विलांस पर है। गांव के लोगों ने उक्त नंबर का छानबीन किया तो वह नंबर गांव से जुड़ा हुआ नहीं था। हालांकि स्थानीय पुलिस के हस्तक्षेप के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह लोग वास्तव में यूपी पुलिस के अधिकारी हैं।

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