कौन थे सीवान के लाल प्रोफ़ेसर बांके बिहारी मिश्रा?

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श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

जयंती पर विशेष

अज्ञानता के इस दौर में हम अर्थतंत्र को महान बना बैठे हैं ऐसे में कई विद्वानों की सुकृतियां काल के गाल में विस्मृत होती जा रही है| आगे आने वाली पीढ़ी को कोई यह बताने वाला नहीं होगा कि ऐसे ऐतिहासिक युगपुरुष, क्रांतिदर्शी, एवं समाजधर्मी, इतिहासकार, चिंतक, लेखक, प्रोफ़ेसर बांके बिहारी मिश्रा कौन थे?

देश की सनातन संस्कृति ने अपनी गौरव विद्वता को कायम रखने के लिए आधुनिक युग में कई लब्ध ख्याति प्राप्त व्यक्ति को जन्म दिया, इसमें से एक थे प्रोफेसर बांके बिहारी मिश्रा| जिनका जन्म सीवान जिला अंतर्गत पचरुखी प्रखंड के कोदई गांव में एक जनवरी 1909 को हुआ था| मिश्रा जी की प्रारंभिक शिक्षा गावं होने के बाद सीवान से 1927 में दसवीं की परीक्षा पास की| आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें बनारस भेजा गया, जहां से 1929 में वे आई. एस. सी. की परीक्षा उत्तीर्ण की| तत्पश्चात ₹60 प्रति माह की बिहार सरकार की छात्रवृत्ति पर जमशेदपुर के टेक्निकल इंस्टिट्यूट में तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में उनका नामांकन हुआ|

वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय में स्नातक प्रतिष्ठा (इतिहास) में अपना नामांकन कराया, जहां से वे 1937 में स्नातकोत्तर करके सीवान लौटे, यहां पर वे पुन: डी.ए.वी. मिडिल स्कूल के प्रधानाध्यापक के पद पर आ गए, लेकिन वहां भी उनकी शोध एवं अध्ययन की प्रवृत्ति बनी रही| थोड़े ही दिनों में के बाद वर्ष 1940 में वे छपरा के राजेंद्र महाविद्यालय के इतिहास विभाग के व्याख्याता नियुक्त हुए, 6 महीने तक अध्यापन कराने के बाद वे डीएवी महाविद्यालय सीवान में इतिहास के विभाग अध्यक्ष के रूप में अपना योगदान 1941 में किया| इसके बाद 1945 में महाविद्यालय के प्राचार्य का पद संभाला व 1947 तक पल्लवित पुष्पित करते रहे|विदित हो की सन1939 में मुंगेर  बिहार साम्यवादी दल के संगठन में संस्थापक सदस्यों में रहे|

24 सितंबर 1990 को 82वर्ष की आयु में सीवान के दक्षिण टोला स्थित अपने ही आवास में उनका स्वर्गवास हो गया|

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