ललित बस स्टैंड के भव्य पंडाल के सेल्फी कॉर्नर से आप करेंगे बस एक क्लिक और प्रसारित होगा रक्तदान का महान संदेश !

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सीवान के ललित बस स्टैंड में मां दुर्गा के भव्य पंडाल के कॉर्नर में बना सीवान ब्लड डोनर क्लब का रक्त दान को प्रेरित करने वाला सेल्फी प्वाइंट बना आकर्षण का केंद्र

✍️गणेश दत्त पाठक

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

निश्चित तौर पर नवरात्रि का त्योहार माता के आराधना का एक सुअवसर होता है। सनातनी परंपरा में त्योहार के साथ उमंग और उल्लास का भी अपना महत्व होता है। नवरात्र में यह उमंग डांडिया रास में दिखता है, पांडालों की भव्यता में दिखता है, मेलों के उल्लास में दिखता है। इन त्योहारों पर भारी संख्या में लोगों से संवाद भी कायम हो जाता है।

जागरूकता ही चुनौतियों का समाधान

कभी राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का संचार किया था। आज भी देश में कई चुनौतियां हैं जिसके लिए जागरूकता की आवश्यकता है। इसमें एक समस्या रक्तदान है जिसके बारे में जागरूकता के अभाव के कारण लोग रकदान के लिए आगे नहीं आते हैं। जिससे कई अनमोल जिंदगिया असमय ही काल की शिकार हो जाती है। अतः रक्तदान के लिए प्रेरित करना मानवता की महान सेवा ही है।

सीवान ब्लड डोनर क्लब का सेल्फी प्वाइंट बना आकर्षण

इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए सिवान ब्लड डोनर क्लब सीवान ने ललित बस स्टैंड में निर्मित भव्य और विशाल पंडाल के कॉर्नर में रक्तदान को प्रेरित करनेवाला एक सेल्फी प्वाइंट बनाया है। जहां भारी संख्या में युवा उमड़ रहे हैं और एक महान संदेश में भी हूं रक्तवीर का प्रसार भी हो रहा है।

रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करना जरूरी

रक्तदान के संदर्भ में समाज में जागरूकता का अभाव है। दुर्घटनाओं और कई व्याधियों से ग्रस्त लोगों के लिए रक्त की आवश्यकता कभी कभी बहुत ज्यादा पड़ जाती है। रक्त ऐसा चीज हैं जिसे कृत्रिम तौर पर तैयार नहीं किया जा सकता इसलिए रक्तदान बेहद जरूरी होता है। इसलिए इस संदर्भ में हर स्तर पर रक्तदान के लिए लोगों को प्रेरित करना और जागरूक करना जरूरी माना जाता है।

लोगों को जागरूक करने के लिए बनाया गया सेल्फी प्वाइंट

अपने जीवन काल में तकरीबन 39 बार रक्तदान कर चुके सिवान ब्लड डोनर क्लब के श्री नीलेश वर्मा नील बताते हैं कि ललित बस स्टैंड के भव्य पंडाल को देखने के लिए प्रतिदिन तकरीबन दस हजार लोग आ रहे हैं। ऐसे में रक्तदान के प्रति जागरूक करने के लिए इस सेल्फी प्वाइंट को स्थापित किया गया है। आज के सोशल मीडिया के दौर में सेल्फी का विशेष क्रेज है। सोशल मीडिया पर सेल्फी के साथ एक महान संदेश रक्तदान महादान का संदेश भी प्रसारित हो रहा है।

रक्त चढाने की जरूरत क्यों?

जीवन बचाने के लिए खून चढाने की जरूरत पडती है। दुर्घटना, रक्‍तस्‍त्राव, प्रसवकाल और ऑपरेशन आदि के समय अत्‍यधिक खून बह सकता है और इस अवसर पर उन लोगों को खून की आवश्‍यकता पडती है। थेलेसिमिया, ल्‍यूकिमिया, हीमोफिलिया जैसे अनेंक रोगों से पीडित व्‍यक्तियों के शरीर को भी बार-बार रक्‍त की आवश्‍यकता रहती है अन्‍यथा उनका जीवन खतरे में रहता है। जिसके कारण उनको खून चढाना अनिवार्य हो जाता है।

रक्‍तदान की आवश्‍यकता क्या?

इस जीवनदायी रक्‍त को एकत्रित करने का एकमात्र् उपाय है रक्‍तदान। स्‍वस्‍थ लोगों द्वारा किये गये रक्‍तदान का उपयोग जरूरतमंद लोगों को खून चढानें के लिये किया जाता है। अनेक कारणों से जैसे उन्‍नत सर्जरी के बढतें मामलों तथा फैलती जा रही जनसंख्‍या में बढती जा रही बीमारियों आदि से खून चढाने की जरूरत में कई गुना वृद्वि हुई है। लेकिन रक्‍तदाताओं की कमी वैसी ही बनी हुई है। लोगों की यह धारणा है कि रक्‍तदान से कमजोरी व नपूसंकता आती है, पूरी तरह बेबूनियाद है। आजकल चिकित्‍सा क्षेत्र में कॅम्‍पोनेन्‍ट थैरेपी विकसित हो रही है, इसके अन्‍तर्गत रक्‍त की इकाई से रक्‍त के विभिन्‍न घटकों को पृथक कर जिस रोगी को जिस रक्‍त की आवश्‍यकता है दिया जा सकता है इस प्रकार रक्‍त की एक इकाई कई मरीजों के उपयोग में आ सकती है।

रक्‍त कौन दे सकता है?

ऐसा प्रत्‍येक पुरूष अथवा महिला:-

जिसकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच हो।
जिसका वजन (100 पौंड) 48 किलों से अधिक हो।
जो क्षय रोग, रतिरोग, पीलिया, मलेरिया, मधुमेंह, एड्स आदि बीमारियों से पीडित नहीं हो।
जिसने पिछले तीन माह से रक्‍तदान नहीं किया हो।
रक्‍तदाता ने शराब अथवा कोई नशीलीदवा न ली हो।
गर्भावस्‍था तथा पूर्णावधि के प्रसव के पश्‍चात शिशु को दूध पिलाने की 6 माह की अवधि में किसी स्‍त्री से रक्‍तदान स्‍वीकार नहीं किया जाता है।

कितना रक्‍त लिया जाता है?

प्रतिदिन हमारे शरीर में पुराने रक्‍त का क्षय होता रहता है ओर प्रतिदिन नया रक्‍त बनता है रहता है।
एकबार में 350 मिलीलीटर यानि डेढ पाव रक्‍त ही लिया जाता है (कुल रक्‍त का 20 वॉं भाग)
शरीर 24 घंटों में दिये गये रक्‍त के तरल भाग की पूर्ति कर लेता है।
ब्‍लड बैंक रेफ्रिजरेटर में रक्‍त 4 – 5 सप्‍ताह तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

क्‍या रक्‍तदान से दाता का कोई लाभ होता है?

हॉं। रक्‍तदान द्वारा किसी को नवजीवन देकर जो आत्मिक आनन्‍द मिलता है उसका न तो कोई मूल्‍य ऑंका जा सकता है न ही उसे शब्‍दों में व्‍यक्‍त किया जा सकता है। चिकित्‍सकों का यह मानना है कि रक्‍तदान खून में कोलेस्‍ट्रॉल की अधिकता रक्‍त प्रवाह में बाधा डालती है। रक्‍त दान शरीर द्वारा रक्‍त बनाने की क्रिया को भी तीव्र कर देता है। रक्‍त के कणों का जीवन सिर्फ 90 से 120 दिन तक का होता है। प्रतिदिन हमारे शरीर में पुराने रक्‍त का क्षय होता रहता है और नया रक्‍त बनता जाता है इका हमें कोई अनुभव नहीं होता। बहुत से स्‍त्री-पुरूषों ने नियमित रूप से रक्‍त दान करने का क्रम बना रखा है। अतः आप भी नियमित रूप से स्‍वैच्छिक रक्‍तदान करें, जिससे रक्‍त की हमेशा उपलब्‍धता बनी रहे कोई सुहागिन विधवा न बने, वृद्व मॉ-बाप बेसहारा न हो, खिलता यौवन असमय ही काल कलवित न हो आज किसी को आपके रक्‍त की आवश्‍यकता है, हो सकता है कल आपको किसी के रक्‍त की आवश्‍यकता हो अतः निडर होकर स्‍वैच्छिक रक्‍त दान करें।

रक्‍त दान कहॉं करें?

रक्‍तदान किसी भी लाईसेन्‍स युक्‍त ब्‍लड बैंक में किया जा सकता है। यह सुविधा सभी जिला-चिकित्‍सालयों में भी उपलब्‍ध है। मान्‍यता प्राइज़ एजेन्सियों जैसे सीवान ब्लड डोनर क्लब, रोटरी क्‍लब, लायंस क्‍लब आदि द्वारा समय-समय पर रक्‍तदान शिविरों का आयोजन किया जाता है। इनमें से किसी भी अधिकृत सील पर आप स्‍वैच्‍छा से निश्चित होकर रक्‍तदान कर सकते हैं।

रक्‍त संचार से पहले जांच?

ब्‍लड बैंक में जारी करने से पहले रक्‍त की प्रत्‍येक इकाई का परीक्षण मलेरिया, सिफलिस, हिपेटाइटिस (सी) व एच.आई.वी. के लिए किया जाता है ताकि सुरक्षित रक्‍त ही मरीज को पहुंचे।

क्‍या रक्‍तदान कष्‍टकारक या हानिकारक होता है?

रक्‍त देते समय कोई पीडा नहीं होती है।
रक्‍तदान करने में 5 से 10 मिनट का समस लगता है।
रक्‍त देन के पश्‍चात आप सभी कार्य सामान्‍य रूप से कर सकते हैं।
रक्‍तदाता के सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य प कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडता है।
स्‍वेच्‍छा से दिया गया रक्‍त, बेचने वाले के रक्‍त से अच्‍छा होता है क्‍योंकि:-
स्‍वेच्‍छा से रक्‍त देने वाला मनुष्‍य, मानव मात्र् की सहायता के लिये रक्‍त देता है, न की धन के लालच से इसलिए वह किसी प्रकार की वर्तमान या पुरानी बीमारी का बतानें में नहीं हिचकिचाता, जिससे रक्‍त प्राइज़ करने वाले का जीवन खतरें में पड सकता है। रक्‍त बेचने वाला धन के लालच में अपने हर रोग को छिपाने का प्रयत्‍न करता है। जिससे रक्‍त प्राइज़ करने वाले को कई प्रकार की बीमारियां लग सकती है। ओर उसका जीवन भी खतरे में पड सकता है। पेशेवर रक्‍तदाता बिना अन्‍तराल के जल्‍दी-जल्‍दी रक्‍तदान करते हैं जिससे उनके रक्‍त में गुणवता का भी आभास हो जाता है।

स्‍वेच्‍छा से रक्‍तदान करने वाले व्‍यक्ति को रक्‍तदान करने के तुरन्‍त बाद रक्‍तदाता ऋण पत्र / प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। जिससे वह रक्‍तदान की तिथि से 12 महिनें तक आवश्‍यकता पडने पर स्‍वंय या अपने परिवारजन के लिये ब्‍लड बैंक से एक यूनिट रक्‍त प्राइज़ कर सकता है अगर आपका या आपके सगे- संबन्धियों को खून चढाने की नौबत आये तो खून की बोतल या थैली पर ‘एच.आई.वी. मुक्‍त’ की मोहर अवश्‍य देखें।

भारत में दान करने की प्रथा है, धन व अन्‍न दान से भी अधिकतम महान रक्‍तदान है क्‍योंकि यह जीवनदान करता है। आओं हम सभी रक्‍त दान-जीवनदान करें। बस यही संदेश तो प्रसारित कर रहा है सीवान ब्लड डोनर क्लब का सेल्फी प्वाइंट।

शानदार सीवान जागरूकता के इस अनुपम प्रयास की सराहना करता है और सीवान ब्लड डोनर क्लब को बधाई प्रेषित करता है। तो आइए आप भी ललित बस स्टैंड पर मां दुर्गा के पंडाल में और क्लिक कर लीजिए एक सेल्फी जो प्रसारित करेगी रक्तदान महादान का संदेश भी।

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